" तोहीद-ए-मकसद "
" में तोहीद हु।मेरा एक मकसद है ~ ये शब्द ह तोहीद, दिलीप कुमार सोनी के है जो एक तोहिदाना अंदाज में व्यक्त किए है! "
इन शब्दों का भारत-वासियों पर एसा जादुई असर पड़ेगा की सच में शहर का जर्रा-जर्रा जग जाएगा और हजारो-हजार लोग "तोहीद के मकसद" में पर्तिदिन शरीक होने लग जायेंगे।
यह पहला अवसर होगा : जब किसी "तोहीद के मकसदों" को पड़ने और सुनने के लिए इतना बडा जन-सेलाब होगा.
मेरे हर शब्द वैचारिक चिंतन अत्यन्त व्यापक है . इन बातो में जनजीवन से जुड़ी हुई ज्वलंत समस्याओ का सटीक समाधान होता है . में एक मकसद का खोजी हु. मेरी हर नज़र में तोहिदाना शामिल है....
आप यकींन करे या ना करे, ये मकसद के शब्द किसी मन्दिर या धर्मशाला की चार दीवारों के बिच नही दिए गए ह, अपितु शहर के उन व्यस्तम चोराहो, महतवपूर्ण ठिकानो पर हुए है , रोजाना २०-३० हजार लोग्गो का आना-जन लगा रहता है .तोहिद के मकसद को पहली बार दिया जाएगा....*
यह अनूठा "तोहिद का मकसद"है
इस मकसद को यादगार बनाने के लिए और तोहिद की हर बात को जन-जन तक पहुचने के लिए, इन्टरनेट का उपयोग किया है .अंतत में;भगवन के चरणों में नमन करता हु जिसकी असिम् अनुकम्पा से यह सब कुछ जो आपके हाथो में है , सम्भव हो सका. इसी आशीर्वाद की आकांशा के साथ में अपनी कलम को आगे बडा रहा हु.................................





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